समकालीन कविता और कवि वेणुगोपाल की काव्यदृष्टि लेखक- रघुनन्दन महापात्र कथ्य की दृष्टि से जीवन की विविधतापूर्ण दैनन्दिन परिस्थितियों के प्रति सजग व्यक्ति की भाषाई संवेदनात्मक प्रतिक्रिया समकालीन कविता का एक ज़रूरी शर्त है। समकालीन कविता किसी खास विचारधारा से संपृक्त नहीं है बल्कि संश्लेषित भावों तथा विविध प्रवृत्तियों का एक समुच्चय है जो इस कविता को खड़ी करती है। “ समकालीन कविता यथार्थ के धरातल पर सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में आत्मचेतस व्यक्ति की भाषागत संवेदनात्मक अभिव्यक्ति है, जो जीवन-संघर्ष में विभिन्न रागात्मक बोधों व मानव मूल्यों, मानवाधिकार के सृजनात्मक पक्ष की पहल ही नहीं करती है, बल्कि प्रतिबद्ध रूप से सामाजिक विकास के वर्गहीन सौन्दर्यात्मक संसार की पक्षधर भी है। ” (1) अब तक की लगभग सभी हिन्दी काव्यधारा के विपरीत किसी विशेष भावधारा से या किसी खास आन्दोलन से समकालीन कविता शुरू नहीं हुई है। लगातार घटनाएँ इसको एक खास तरह की बनाने के लिए अपना योगदान देती आईं हैं। और ये घटनाएँ अलग-अलग समय में घटती हैं इसलिए समकालीन कविता की शुरूआत को लेकर एक द्वन्द्...