समकालीन हिन्दी कविता के सन्दर्भ में समकालीनता लेखक- रघुनन्दन महापात्र वह कविता जिसमें जीवन की विविधतापूर्ण परिस्थितियों के प्रति सामाजिक,आर्थिक, राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में सजग व्यक्ति की भाषागत संवेदनात्मक प्रतिक्रिया होती है वह समकालीन कविता है। जब हम साहित्य इतिहास के किसी युग को रीतिकाल या आधुनिक काल के रूप में पृथक करते हैं तो आखिरकार हम रीति या आधुनिकता जैसे किसी संबंध-सुत्र के ज़रिए कुछ समकालीन रचनाकारों को ही इकट्ठा करते हैं और उनको हम उनके जीवनकाल से नहीं अपितु उनकी रचनाओं की प्रवृत्तियों से निर्धारित करते हैं। डॉ रवीन्द्र भ्रमर ‘ समकालीन ’ शब्द के तीन अर्थ कहते हैं—एक तो काल विशेष से संबद्ध, दूसरे व्यक्ति विशेष के काल-यापन से संबद्ध और तीसरे साहित्य समाज अथवा प्रवृत्ति विशेष से संश्लिष्ट कालखण्ड़। ( 1 ) इनमें से अगर प्रवृत्ति के आधार पर समकालीन की बात करें तो समकालीनता की परिधि और चौड़ी हो जाती है। कुछ कुछ स्तरों पर निराला जैसे कवि भी समकालीन प्रमाणित किए जा सकते हैं। काल विशेष के आधार पर मोहम्मद रफी और अज्ञेय की चर्चा हो सकती है। समकालीन कविता का मूल आधार...
Posts
Showing posts with the label Samkalin Hindi kavita ke Sandarbh mein Samkalinta