सर्जनात्मक आलोचक राजेश जोशी की आलोचनाः एक अवलोकन लेखक- रघुनन्दन महापात्र सह लेखक- डॉ मधुलिका बेन पटेल राजेश जोशी मूलतः कवि हैं। समकालीन कविता के एक लोकप्रिय कवि हैं। राजेश जोशी एक ऐसे कवि के रूप में जाने जाते हैं जो अपने समय और समाज की गहरी समझ रखते हैं और उसे अपनी कविता में प्रस्तुत भी करते हैं। कवि होने के कारण उन्होंने जो आलोचना लिखी वह उनकी कविता की समझ से बनी आलोचना है। इसलिए यह निःसंशय ही सर्जनात्मक आलोचक हैं। इसी वजह से इनकी आलोचना रचना प्रक्रिया , रचना की चिन्ताओं उसके संघर्ष और उसकी उम्मीदों को ठीक समझ पाती है। इनकी आलोचना पाठ के मूल स्वर उसके मर्म को समझती है। वह कविता की तरह अपनी आलोचना में भी सजग हैं। अपनी आलोचना में वह ऐसे कुछ सवाल पर विचार करते हैं जिनको समझे बगैर समकालीन कविता को समझना कठिन है। इनकी आलोचना में वह सूत्र विद्यमान हैं जिनसे समकालीन कविता को समझने में आसानी होगी। राजेश जोशी एक सर्जक होने के नाते उनकी आलोचना कविता के प्रति उदासीन होती जाती आलोचकीय दृष्टि की दुर्बलताओं के बारे में मुखर होती है तथा उससे कविता को पढ़ने के तरीकों के ...