भीमाभूयाँ उपन्यास में चित्रित आदिवासी जीवन लेखक- रघुनंदन महापात्र विविधता में एकता हमारे देश की विशेषता है। विविधता में एकता से तात्पर्य है कि एक ही समाज में हम तरह तरह के विश्वासों के लोग रहते हैं , तरह तरह के धर्म को मानने वाले , भिन्न-भिन्न संप्रदायों से संबंधित लोग , अलग-अलग विचारधाराओं के लोग , कई कई नस्लों के लोग एक दूसरे की भावनाओं और भरोसे को बिना आहत किए एक साथ भाईचारे को बरकरार रखते हुए रहते हैं। ये विशेषता हमें अभूतपूर्व ताकत देती है। ऐसे उदाहरण हैं इतिहास में जब हम सब एक हो कर अपनी शक्ति सामर्थ्य का प्रदर्शन किए हैं , अपनी एकता से विश्व को अभिभूत किए हैं। लेकिन साथ में ऐसे भी दुर्भाग्यपूर्ण इतिहास से गुजरे हैं जब हम अपनी ओछी विचारों के चलते , भेदभावपूर्ण व्यवहार के कारण बंटे हुए नजर आते हैं। फलतः इसका परिणाम हमें बहुत भयंकर भूगतना पड़ा है। ऐसे कई समुदाय हैं जिनमें से एक आदिवासी समुदाय है जिससे हम इतिहास में कदम से कदम मिलाकर , कंधे से कंधा मिलाकर , साथ साथ एक साथ कभी कभी जरूर चले थे लेकिन हमेशा ऐसा नहीं हुआ...